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माँ की जिम्मेदारिया

Posted On: 13 Sep, 2012 Others में

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आज के दौर में माँ की जिम्मेदारिया और प्रथमिकताये बहुत बदल गई है . मुझे नहीं याद की मेरी माँ ने मुझे कभी बैठ के पढ़ाया हो उनकी अपनी समस्याए रही होगी पर आज माँ की जिम्मेदारियां पहले की अपेक्षा बहुत बढ़ गयी है | आज सभी बच्चे बुद्धिमान है |उनकी आवश्यकताएं और दायरे भी विस्तृत हो गए है | उनकी जरुरतो के अनुसार माँ को भी अपने को बदलना पड़ता है | घर से लेकर बाहर तक सारी जिम्मेदारियां वो ख़ुशी ख़ुशी उठा रही है | बच्चो को स्कूल भेजने से लेकर ,उनको वापस लाना ,उनकी एक्स्ट्रा क्लासेज से लेकर उनकी पढाई आदि सब बातों का पूरा ध्यान रखती है |
ये हमारी आवश्यकता भी है और मज़बूरी भी | हमें अपने आप को साबित करने के लिए ये जिम्मेदारियां तो उठानी ही पड़ेगी |पर कभी कभी लगता है की इन सब में हमने अपने आप को कही खो दिया है |कभी कभी मन करता है की माँ की गोद में सर रख कर चुपचाप लेटी रहू |

आज प्रतिस्पर्धा इतनी अधिक है की हर माँ अपने बच्चो के साथ किताबें खोले बैठी हुई है |हर माँ की यही चाहत रहती है की उनके बच्चे सबसे आगे रहे | मुझे लगता है की आज माँ की जिम्मेदारिया अपने बच्चो के लिए इसलिए और बढ़ गयी है की इस बदलते सामाजिक परिवेश में जहाँ नैतिक मूल्यों में लगातार कमी आ रही ,वहां माँ ही अपने बच्चो को सामाजिक व् नैतिक मूल्यों के बारे में ज्ञान दे सकती है |
एक रिसर्च के अनुसार बच्चा पहला असल प्यार अपनी माँ से ही करता है |वही उसेपहली बार मालूम होता है की सच्चा प्यार क्या होता है |
वह अपना हर कम माँ को दिखाना चाहता है इसी तरह माँ के लिए असली केंद्र वही होता है |इसीलिए माँ उसे जिस भी साचे में चाहे ढाल सकती है |

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43 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
March 12, 2016

आदरणीया अलका जी बहुत सुन्दर आलेख प्रेम तो सब कुछ जीत लेता है और वह भी माँ का तो निराला है जो प्रेम का मूल है माँ की सच में बड़ी जिम्मेदारी आन पड़ी है नैतिक मूल्य संस्कार सुधार सब कुछ उसे हाथ में लेना है संतति भटक गयी तो सब बेकार .. आप की माँ या और किसी की माँ ने पढ़ाया भले न हो लेकिन वे दिए गए संस्कार नैतिक मूल्य सही गलत की व्याख्या निश्चित ही आप के जीवन को आज चमक दे रही है राधे राधे भ्रमर 5

harirawat के द्वारा
March 1, 2016

अलका जी चंद शब्दों में माँ के बारे में बहुत कुछ कह दिया है आपने ! बच्चों की पहली पाठशाला घर है और माँ हेडमास्टर ! “माता शत्रु पिता बैरी एन बालो न पाठिता, न शोभते सभा मध्ये हंस मध्ये यको तथा” ! सबसे पहली जिम्मेदारी माँ पर पड़ती है ! अति सुन्दर लेख के लिए आप वधाई के पात्र हैं !

    Alka के द्वारा
    March 10, 2016

    आदरणीय सर जी आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है | रचना पसंद करने के लिए धन्यवाद | आगे भी आशीर्वाद बनाये रखियेगा | साभार ..

sadguruji के द्वारा
February 24, 2014

बहुत सार्थक व शिक्षाप्रद पोस्ट.आपको बधाई.

    Alka के द्वारा
    February 25, 2014

    आदरणीय सद्गुरुजी , आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है | आगे भी अपना आशीर्वाद बनाये रखियेगा | साभार ..

rekhafbd के द्वारा
February 22, 2014

अलका जी ,ईश्वर का दूसरा नाम माँ है ,बहुत अच्छा आलेख ,बधाई

    Alka के द्वारा
    February 25, 2014

    रेखा जी , रचना पसंद करने वसरहना के लिए धन्यवाद| साभार ……

seemakanwal के द्वारा
October 28, 2013

माँ तो बीएस माँ होती है .आभार .

bhanuprakashsharma के द्वारा
October 25, 2013

मां की महत्ता में जितने भी शब्द कहे जाएं, वे कम ही हैं।

    Alka के द्वारा
    February 25, 2014

    भानु जी , रचना पसंद करने के लिए धन्यवाद | साभार ..

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
October 19, 2013

आदरणीया अलका जी ..सुन्दर और उपयोगी आलेख इस बदलते सामाजिक परिवेश में जहाँ नैतिक मूल्यों में लगातार कमी आ रही ,वहां माँ ही अपने बच्चो को सामाजिक व् नैतिक मूल्यों के बारे में ज्ञान दे सकती है |.. सुन्दर वक्तव्य आप का ..सच में बड़ी जिम्मेदारियां हैं माँ की ..अक्सर पिता धनार्जन के पीछे ही भटकता रहता है कुछ अपवाद छोड़कर और माँ सच संस्कार प्यार पालन पोषण कर निखार सकती है जय श्री राधे भ्रमर ५

    Alka के द्वारा
    October 23, 2013

    आदरणीय सुरेन्द्र जी , मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है | प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद | साभार …

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 13, 2013

आदरणीया अलका जी सादर अभिवादन आज आपको फिर मंच पर देख कर खुशी हुई, आशा है की अब ये दौर लंबा चलेगा , आपत्ति न हो तो फेस बुक के साहित्य संगम में पधारने का कष्ट करें. स्वागत है

aman kumar के द्वारा
April 12, 2013

आज माँ की जिम्मेदारिया अपने बच्चो के लिए इसलिए और बढ़ गयी है की इस बदलते सामाजिक परिवेश में जहाँ नैतिक मूल्यों में लगातार कमी आ रही ,वहां माँ ही अपने बच्चो को सामाजिक व् नैतिक मूल्यों के बारे में ज्ञान दे सकती है | बिलकुल सही कहा कहा आपने ! माँ ही तो बच्चो के पास रहेती है पिता तो परिवार चलने के लिए लगा रहता है ! माँ परिवार को बनती है ………. आभार !

    Alka के द्वारा
    May 3, 2013

    अमन जी आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है | उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद | आगे भी सहयोग बनाये रखियेगा | साभार …

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
April 9, 2013

aadarniyaa सादर अभिवादन आप मेरी पोस्ट पर स्नेह देने हेतु पधारीं आभार माँ ही अपने बच्चो को सामाजिक व् नैतिक मूल्यों के बारे में ज्ञान दे सकती है ..सत्य है. आपकी अगली पोस्ट का इन्तजार है.

    Alka के द्वारा
    May 3, 2013

    आदरणीय , सर्वप्रथम आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है | प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद | आगे भी सहयोग बनाये रखियेगा | साभार ..

Lahar के द्वारा
March 23, 2013

माँ तो माँ है ! सार्थक लेख …

    Alka के द्वारा
    May 3, 2013

    लहर जी , आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है| रचना पढने व् प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद | आगे भी सहयोग बनाये रखियेगा |

meenakshi के द्वारा
March 20, 2013

अलका जी , यह बात बिलकुल सच है कि- “बच्चा पहला असल प्यार अपनी माँ से ही करता है |” अतः माँ उसे जिस भी साचे में चाहे ढाल सकती है | बहुत अच्छे विचार लिखे हैं – बहुत-२ शुभकामनाएं . मीनाक्षी श्रीवास्तव

    Alka के द्वारा
    March 21, 2013

    मीनाक्षी जी , आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है | प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद |आगे भी प्रोत्साहन करते रहिएगा |

March 2, 2013

बहुत ही सार्थक लेख अलका जी , 

    Alka के द्वारा
    March 3, 2013

    sudhir ji , rachna padhne v pratikriya ke liye dhanyavad ….

Shweta के द्वारा
March 1, 2013

वास्तव में माँ की जिम्मेदारियां आज बहुत बढ गई है…… एक सार्थक और सुन्दर लेख ….!!

    Alka के द्वारा
    March 2, 2013

    shweta जी , सर्वप्रथम आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है | आपको रचना पसंद आई ,धन्यवाद …

deepakk के द्वारा
January 1, 2013

एक सार्थक प्रस्तुति….. हर इंसान के अन्दर एक बचपन होता है लेकिन उसको अभिव्यक्त करने की जो स्वतंत्रता हमे बचपन में होती है वो फिर कभी नहीं मिलती.

    Alka के द्वारा
    January 7, 2013

    दीपक जी आपका मेरे ब्लॉग par स्वागत है | लेख पढने और प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् |

akraktale के द्वारा
December 27, 2012

कुछ या काफी देरी से इस पोस्ट को पढ़ने का अवसर मिला है.कल और आज में बड़ा फर्क प्रतियोगिता का है और यही कारण है कि माँ भी बच्चों के साथ किताब खोले बैठी है.सत्य को सही अंकित किया है आपने अलका जी. सादर.

    Alka के द्वारा
    January 7, 2013

    रक्ताले जी , आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् | सच में माँ की जिम्मेदारियां आज बहुत बढ गई है |

nishamittal के द्वारा
November 9, 2012

आपसे सहमती है अलका जी.

Sushma Gupta के द्वारा
November 7, 2012

आपको भूलवश सुधाजी का संबोधन हो गया अलकाजी.

    Alka के द्वारा
    November 8, 2012

    नमस्कार सुषमा जी , सर्वप्रथम तो आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है | सच है मां से दूर होने पर उनका प्यार और अधिक याद आता है |

sudhajaiswal के द्वारा
November 5, 2012

अलका जी, इस दुनियां में मां का प्यार अनमोल और निःस्वार्थ होता है, अच्छी प्रस्तुति के लिए बधाई|

    Alka के द्वारा
    November 5, 2012

    सुधा जी मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है ..|आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् | आगे भी अपना सहयोग बनाये रखियेगा |

Madan Mohan saxena के द्वारा
October 31, 2012

अच्छी सार्थक प्रस्तुति,,,,,

October 30, 2012

बहुत ही अच्छी सार्थक प्रस्तुति,,,,,,,,,,, आज सभी माओ में सुपर मोंम बनने की होड़ लगी हुई है |

    Alka के द्वारा
    October 30, 2012

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् हिमांशु जी |ये बिलकुल सच है

seemakanwal के द्वारा
October 19, 2012

अल्काजी बचपन तो हमारे अन्दर हमेशा छुपा रहता है .

    Alka के द्वारा
    October 30, 2012

    धन्यवाद् सीमाजी आपकी प्रतिक्रिया के लिए |

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
October 13, 2012

क्यों नहीं ? माँ की गोद में जो स्वर्ग का सुख होता है ! अच्छी अभिव्यक्ति ! बधाई !!

    Alka के द्वारा
    October 14, 2012

    धन्यवाद विजय जी | सच में मां की गोद का सुख सिर्फ महसूस किया जा सकता है |

Alka के द्वारा
September 20, 2012

dhanyawad dinesh ji


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