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भीख - एक समस्या

Posted On: 23 Feb, 2014 Others में

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जैसे ही कार चौराहे पर पहुची ,सिग्नल हो गया कुछ ही पलों में एक १७ -१८ साल की लड़की
गोद में एक छोटा बच्चा लिए पास आई | गंदे मैले कुचैले कपड़ों में ढकी वह बेहद दयनीय मुद्राएं
बना रही थी | गोद का बच्चा भी जैसे सब समझ रहा था |उसकी आँखें भी जैसे कुछ कह रही थी |
;” उस लड़की ने माथे पर हाथ लगा कर भीख मांगने के लिए
हाथ फैला दिया|

ताज्ज़ुब तब हुआ जब गोद वाले बच्चे ने भी हाथ माथे से लगा कर भीख मांगने
के लिए हथेली फैला दी |मन अंदर तक कही दुःख गया |फिर ये सोचा की बच्चे तो वही सीखते है ,
जो अपने आस पास देखते है |बहुत मन किया की इन्हे कुछ ज्यादा पैसे दे दू ताकि ये कुछ अच्छा
खा सकें |पर तभी मष्तिष्क ने सरगोशी की कि क्या पता ये पैसे ये प्रयोग कर भी पाएंगी या कोई
और ले जायेगा |आखिर दिल की मानते हुए मैंने उन्हें रूपये दे ही दिए |

अक्सर पत्रिकाओ व समाचार पत्रों में पढ़ती रहती हूँ फलां जगह भीख मंगवाने वाला गैंग पकड़ा गया वगैरह-वगैरह,
इसलिए उन्हेंररुपये देने के सख्त खिलाफ हूँ |वैसे भी मै खाने पीने की वस्तुएं या कपडे आदि देने में ज्यादा
सहज रहती हु ,ताकि वे उसे प्रयोग कर सकेंबहुत सोचती रही इस बारे में पर ये समस्या इतनी गम्भीर है की
इसके लिए सम्मिलित प्रयास जरुरी है |एक बार मैंने ये गौर किया की इनके क्षेत्र भी शायद बटे रहते है |
मैंने तो मिलती जुलती शक्ल के तीन चार भिखारी अलग अलग चौराहों पर देखे ,शायद वो भाई रहें होंगे |

मै इतनी भ्रमित थी की ये एक भिखारी इतनी जल्दी दूसरे चौराहे पर कैसे पहुच जाते है |मेरे शहर में कई ऐसी
घटनाएं सामने आई ,जिसमे जब इन लोगों को को पैसे आदि देने के लिए लोगों ने कार की खिड़की खोली तो
उन्होंने गन दिखा कर उन्हें लूट लिया| ऐसी घटनाओं से उनके प्रति दयाभाव भी कम हो जाता है ,और डर की
भावना बढ़ जाती है |लगता है ये भिखारी है या लुटेरे|
वैसे भी अगर कोई आत्मसम्मान की परवाह न करे तो ,बिना मेहनत के कुछ कमाने के लिए भीख मागने से
आसान क्या होगा | पर ये हमारे समाज पर तो धब्बा ही है न ………

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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 2, 2014

माँगना और उसपर भी भीख , अत्यंत अधम वृत्ति ! फिर भी अगर कोई ज़रूरतमंद है और साथ ही अपंग तो उसे अवश्य देना चाहिए ! बहुत ज़रूरी पोस्ट ! हार्दिक बधाई अलका जी !

    Alka के द्वारा
    March 2, 2014

    आचार्य जी , आपकी बात से मई पूर्णतया सहमत हूँ | प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद |

R K KHURANA के द्वारा
March 1, 2014

प्रिय अलका जी, समाज के एक कोढ़ के बारे में सुंदर लेख लिखने पर मेरी बधाई ! http://khuranarkk.jagranjunction.com/2014/02/18/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%A4%E0%A4%AE-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%9C%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B6/ राम कृष्ण खुराना

    Alka के द्वारा
    March 2, 2014

    आदरणीय , रचना पसंद करने के लिए धन्यवाद |

ashfaqahmad के द्वारा
February 25, 2014

inme jyadatar drug-adict hote hain jinhe nashe ke liye paise chahiye hote hain , wo loot bhi sakte hain aur apne bachcho ka sahara bhi bheek mangne ke liye le sakte hain

    Alka के द्वारा
    February 25, 2014

    अशफ़ाक़ जी , आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है | एकदम सच कहा आपने | साभार ..

sanjay kumar garg के द्वारा
February 24, 2014

आदरणीया रेखा जी! नमस्कार! आप की बात बिलकुल सही है!

OM DIKSHIT के द्वारा
February 23, 2014

अलका जी, नमस्कार. आप का कहना सही है.आज-कल सही जरूरत-मंद और स्वांग रच कर भीख मांगने वालो में अंतर करना कठिन है.अच्छे भले स्वस्थ लोग जब हाथ फैलते हुए नज़र आते हैं तो ….मन उद्वेलित होता है,ऐसे में जरूरत-मंदों को भी सहायता नहीं मिलती.जो भी हो….वस्तु या खाद्य-पदार्थ की सहायता का मैं भी पक्षधर हूँ.

    Alka के द्वारा
    February 25, 2014

    आदरणीय ॐ जी , प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद् साभार ..


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