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प्रेम ,ढाई आखर का यह करामाती शब्द (कांटेस्ट )

Posted On: 1 Mar, 2014 Others में

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प्रेम ,प्यार ,इश्क ,मोहब्बत कई नाम है इसके | पर हर कोई अपनी अलग परिभाषा गढ़ लेता है प्रेम की| कही पढ़ा था – प्रेम ! एक शब्द ! एक अनुभूति ! एक जीवन ! एक धड़कन !एक प्रतीक्षा ! एक राग ! एक सुबह ! एक धुन !एक उड़ान ! एक तड़प! एक यात्रा !एक संसार ! एक कोमल अंतरभाव ! एक प्यास ! एक पुकार ! एक चेहरा !एक बोल !एक याद ! …कितना अपार , कितना अपरूप व्यास है प्रेम के वृत्त का ..बंधता ही नहीं भाषा में |
प्रेम में कोई हिसाब किताब नहीं होता कुछ पाने की बजाय देने की इच्छा अधिक प्रबल होती है| स्त्रियाँ जन्मजात रूप से
भावुक होती है |वह सिर्फ भाव की भूखी होती हैं | एक प्यार भरा स्पर्श एक स्नेहिल मुस्कान उसकी हर पीड़ा हर लेते हैं|
प्यार में वह ताकत है जो दुनिया बदल सकती है |किसी के जीवन में प्यार दस्तक दे दे तो उसके जीवन में बदलाव आना स्वाभाविक है |
प्यार के अहसास को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता | इसमें डूबे हुए इंसान का ब्यवहार बता देता है की वो प्यार की गिरफ्त में है |
ओशो कहते हैं -प्रेम एक दान है भिक्षा नहीं |प्रेम मांग नहीं भेट है |प्रेम भिखारी नहीं सम्राट है |जो मांगता है उसे और जो बांटता है
उसे प्रेम मिलता है | प्रेम एक ऐसा अहसास है जिसे पूर्णतः शब्दों में व्यक्त ही नहीं किया जा सकता है |
इसे वह ही महसूस कर सकता है जिसने प्यार किया हो |
प्रेम का अपना सौंदर्य होता है |इसकी चमक इसके भीतर ही होती है |प्रेम की आंतरिक बुनावट उसे निखारती है |प्रेम का आधार बाहरी सुंदरता
से कही अधिक पारस्परिक विश्वास और स्वतंत्रता जैसे उत्कृष्ट मूल्य से बनता है | बाह्य सौंदर्य उस किताब के आवरण जैसा है ,
जिसको देखकर किताब के कंटेंट का ,उसके अंतर्जगत का ,बहिर्जगत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता |
प्रेम के लिए जिस सौंदर्य की आवश्यकता है वह है क़ि – जो मुझे प्रेम करता है उसके लिए मैं खूबसूरत हूँ ,और जितना प्रेम करता है उतनी ही
खूबसूरत हूँ|
मजरूह सुल्तानपुरी क़ी ये पंक्तिया बहत कुछ बयां कर जाती है ………
मुझे सहल हो गई मंजिलें , वो हवा के रुख भी बदल गए
तेरा हाथ हाथ में आ गया , कि चिराग राह में जल गए ||

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प्रेम ,प्यार ,इश्क ,मोहब्बत कई नाम है इसके | पर हर कोई अपनी अलग परिभाषा गढ़ लेता है प्रेम की|
कही पढ़ा था – प्रेम ! एक शब्द ! एक अनुभूति ! एक जीवन ! एक धड़कन !एक प्रतीक्षा ! एक राग ! एक सुबह ! एक धुन !एक उड़ान ! एक तड़प! एक यात्रा !एक संसार ! एक कोमल अंतरभाव ! एक प्यास ! एक पुकार ! एक चेहरा !एक बोल !एक याद ! …कितना अपार , कितना अपरूप व्यास है प्रेम के वृत्त का ..बंधता ही नहीं भाषा में |

प्रेम में कोई हिसाब किताब नहीं होता कुछ पाने की बजाय देने की इच्छा अधिक प्रबल होती है| स्त्रियाँ जन्मजात रूप से
भावुक होती है |वह सिर्फ भाव की भूखी होती हैं | एक प्यार भरा स्पर्श एक स्नेहिल मुस्कान उसकी हर पीड़ा हर लेते हैं|
प्यार में वह ताकत है जो दुनिया बदल सकती है |किसी के जीवन में प्यार दस्तक दे दे तो उसके जीवन में बदलाव आना स्वाभाविक है |
प्यार के अहसास को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता | इसमें डूबे हुए इंसान का ब्यवहार बता देता है की वो प्यार की गिरफ्त में है |

ओशो कहते हैं -प्रेम एक दान है भिक्षा नहीं |प्रेम मांग नहीं भेट है |प्रेम भिखारी नहीं सम्राट है |जो मांगता है उसे और जो बांटता है
उसे प्रेम मिलता है | प्रेम एक ऐसा अहसास है जिसे पूर्णतः शब्दों में व्यक्त ही नहीं किया जा सकता है |
इसे वह ही महसूस कर सकता है जिसने प्यार किया हो |

प्रेम का अपना सौंदर्य होता है |इसकी चमक इसके भीतर ही होती है |प्रेम की आंतरिक बुनावट उसे निखारती है |प्रेम का आधार bahri सुंदरता
से कही अधिक पारस्परिक विश्वास और स्वतंत्रता जैसे उत्कृष्ट मूल्य से बनता है | बाह्य सौंदर्य उस किताब के आवरण जैसा है ,
जिसको देखकर किताब के कंटेंट का ,उसके अंतर्जगत का ,बहिर्जगत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता |
प्रेम के लिए जिस सौंदर्य की आवश्यकता है वह है क़ि – जो मुझे प्रेम करता है उसके लिए मैं खूबसूरत हूँ ,और जितना प्रेम करता है उतनी ही
खूबसूरत हूँ|
मजरूह सुल्तानपुरी क़ी ये पंक्तिया बहत कुछ बयां कर जाती है ………

मुझे सहल हो गई मंजिलें , वो हवा के रुख भी बदल गए
तेरा हाथ हाथ में आ गया , कि चिराग राह में जल गए ||

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ashutosh Shukla के द्वारा
March 16, 2014

सुन्दर अभिव्यक्ति अलका मैम ….शब्द चयन खूबसूरत हैं…. http://ashutoshshukla.jagranjunction.com/

meenakshi के द्वारा
March 12, 2014

अति सुन्दर प्रेम / प्यार की भावाभ्यक्ति ! अलका जी आपको बहुत -२ बधाई ! साथ ही होली पर्व की अनेकानेक शुभकामनाओं के साथ – मीनाक्षी श्रीवास्तव

sanjay kumar garg के द्वारा
March 4, 2014

प्रेम इक रूप अनेक! सुन्दर प्रेममय आलेख, आदरणीया अलका जी! बधाई!


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