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एक ख्याल .......

Posted On: 4 Nov, 2014 कविता में

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एक ख्याल ,……

तनहा अकेले रहने का

;.सबसे दूर……….

जहाँ पा सकूँ खुद को

समझ सकूँ उन झंझावातों को

जो तन, मन, विचार

सबको झिंझोड़ते जाते हैं …

एक कोशिश,………

दूर रहने की उनसे

,जो बेहद करीब हैं दिल के

पर कहने को दूर हैं जो

पर फिर भी बंधे न जाने किस डोर से

एक भरोसा ……
न मिले ,पर अहसास साथ होने का ,

अहसासों में ही तय कर लेंगे एक लम्बा सफर

जैसे पटरियां रेल की …..

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
November 7, 2014

न मिले ,पर अहसास साथ होने का , अहसासों में ही तय कर लेंगे एक लम्बा सफर जैसे पटरियां रेल की ….. बिना किसी भारी भरकम शब्दों के ,मन के गहरे ज़ज्बातों में गुंथी हुई बहुत खूबसूरत रचना ,अल्काजी .

    Alka के द्वारा
    November 8, 2014

    आदरणीय निर्मला जी .. आपने रचना पसंद कीऔर PROTSAHIT KIYA SABHAR धन्यवाद .. आप सब से अभी बहुत कुछ सीखना है ..

jlsingh के द्वारा
November 4, 2014

अहसासों में ही तय कर लेंगे एक लम्बा सफर जैसे पटरियां रेल की ….. बहुत ही सुन्दर भाव आदरणीया अलका जी!

    Alka के द्वारा
    November 4, 2014

    आदरणीय सिंह जी बहुत दिनों बादआपसे ब्लॉग पर भेंट हुई | प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद .. साभार ..


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