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दिल की ख्वाहिश है...

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आज तुम कुछ गुनगुनाओ
दिल की ख्वाहिश है
तार दिल का छेड़ जाओ
दिल की ख्वाहिश है||

चाँद तारों के जहाँ में
हाथ में ले हाथ
तुमको वो दुनियां घुमाऊं
दिल की ख्वाहिश है ||

काँधे पे रखकर तुम्हारे
सर को अपने आज फिर
मैं भी तुम संग गुनगुनाउ
दिल की ख्वाहिश है ||

ख्वाब तो हैं क्या जरुरी
सारे पूरे हों
पर सोचूँ तुमको मुस्कराऊं
दिल की ख्वाहिश है ||
दिल की ख्वाहिश है||
अलका ….

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjeevtrivedi के द्वारा
December 25, 2014

अलका जी बहुत ही सुन्दर कविता…

    Alka के द्वारा
    December 30, 2014

    संजीव जी ,आपका ब्लॉग पर स्वागत है | रचना पसंद करने के लिए धन्यवाद ..


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