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याद आई तू प्यारी माँ...

Posted On: 10 May, 2015 कविता में

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आज सुबह जब आँख खुली तो
याद आई तू प्यारी माँ
हर दिन की है यही कहानी
क्या समझाऊँ म्रेरी माँ ,

सूती साड़ी में लिपटी तू
जूड़ा को सहलाती माँ
घर भर में फिरती थी ऐसे
जैसे सुबह की लाली माँ ,

अपना हिस्सा मुझे खिला कर
तू कह देती पेट भरा
कभी भी अपने लिए कोई ना
चीज बचाती मेरी माँ ,

आज भी याद है चोट लगी थी
जब मेरी ऊँगली में तब
अपनी पीड़ा को तेरी आँखों में

तरा पाती थी माँ ,

आज भी मेरा सर जब तू
अपने हाथों से सहलाती है
सच कहती हु सुख दुनिया के
सारे मैं पा जाती माँ ,

कितने सुन्दर चेहरे देखे
मैंने गर सच बोलू तो
पर मेरी आँखें तो तुमको ही
सबसे सुन्दर है पाती माँ ,

आज सुबह जब आँख खुली तो
सच कहती हु प्यारी माँ
याद आई तू मेरी माँ .

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
May 12, 2015

प्रिय अलका——- सूती साड़ी में लिपटी तू जूड़ा को सहलाती माँ घर भर में फिरती थी ऐसे जैसे सुबह की लाली माँ इन लाईनों में मेरी माँ समाई है  डॉ शोभा

    Alka के द्वारा
    May 25, 2015

    आदरणीय शोभा जी आपके प्रोत्साहन भरे आशीर्वाद के लिए धन्यवाद . माँ तो ऐसी ही होती है ..

Shobha के द्वारा
May 12, 2015

प्रिय अलका यह लाईने ऐसी हैं जिनमें मेरी माँ समाई है माँ को लेकर बहुत अच्छी कविता डॉ शोभा

DEEPTI SAXENA के द्वारा
May 10, 2015

Great so touching

    Alka के द्वारा
    May 10, 2015

    धन्यवाद दीप्ति ब्लॉग पर आने और रचना पसंद करने के लिए ..


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