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कल श्राद्ध था ....

Posted On: 1 Oct, 2015 कविता में

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कल श्राद्ध था ,
खुशबुएँ पकवानों की महका रही थी मन
यू जैसे किसी त्यौहार के
होने का अहसास था .
वो जिन्हे गुजरे कई वर्ष हो गए
उनकी याद ,में कल श्राद्ध था ||

मान्यवर आमंत्रित थे भोजन के लिए
पंडित जी के लिए भी बनाया गया
एक आसान खास था
कल श्राद्ध था ||

भोजनोपरांत दे दक्षिणा
सबको विदा करके
गौरवान्वित हर आम और खास था
कल श्राद्ध था ||

मन मेरा विचलित था
न जाने क्यों ये सब देखकर
शायद मेरे मन में विचारों का एक झंझावात था
कल श्राद्ध था ||

है नहीं वो जो इसे
देखते व् महसूस करते
उनके नाम पर आज ये
आयोजन खास था
कल श्राद्ध था ||

है हमारे आसपास
कितने ही बेबस और लाचार
खाने को न एक दाना भी जिनके पास था
कल श्राद्ध था ||

जो भरे पेट हैं वो
बांध कर ही ले जायेंगे
भूखों का जो पेट भरता
वो होता एक मधुर अहसास था
कल श्राद्ध था ||

जो न होक भी हमारे
साथ हर पल है सदा
उनके आदर्शों से ये जीवन
कुछ प्रकाशित होता तो
हाँ सही अर्थों में होता

वही सच्चा श्राद्ध था
हाँ वही सच्चा श्राद्ध था||

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepak pande के द्वारा
October 6, 2015

bahut khoob satya ko bayan karti kavita bhawnaon se paripurn

    Alka के द्वारा
    October 11, 2015

    आदरणीय दीपक जी , आपका ब्लॉग पर स्वागत है | आपके protsahan ke liye dhanyawad | aage भी उत्साहवर्धन करते rahiyega | साभार ..

Madan Mohan saxena के द्वारा
October 5, 2015

सुन्दर सार्थक रचना कभी इधर भी पधारें

    Alka के द्वारा
    October 11, 2015

    आदरणीय मदन मोहन जी , रचना पसंद करने ke liye dhanyawad | ativyasta ke chalte ब्लॉग पर aana thoda kathin ho जाता है | प्रयासरत हूँ की नियमित ब्लॉग पर upsthit रहू||

Ravindra K Kapoor के द्वारा
October 2, 2015

बहुत ही सुन्दर सत्य से ओत प्रोत है आपकी ये कविता .”भूखों का जो पेट भरता’ वो होता एक मधुर अहसास था कल श्राद्ध था || काश हम कुछ उस श्राद्ध पर भी विचार कर पाते. Ravindra K Kapoor

    Alka के द्वारा
    October 4, 2015

    आदरणीय रविन्द्र जी , आपका ब्लॉग पर स्वागत है | रचना पढ़ने व् प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद | साभार


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