Sukirti

Just another weblog

41 Posts

247 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12075 postid : 1177738

तेरे सिवा माँ ....

Posted On: 15 May, 2016 कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

तेरे सिवा माँ ,
कहां  पाऊं मैं और ये प्यार का खजाना ,
तुम बहुत जरुरी हो आज भी ये तुमको है बताना

तेरे सिवा माँ,
आज भी तेरा प्यार से मेरे सर को सहलाना ,
बहुत  भाता है माँ तेरा ये प्यार लुटाना

तेरे सिवा माँ ,
अपनी पीड़ा आँखों में तू कैसे छुपा लेती है ,
पर आज भी मेरे दर्द को तेरी आँखों में पाना |

"तेरे सिवा माँ ,
कही नहीं तेरे  जैसा स्वाद खाना मैंने खाया,
उसे याद करके आज भी मुंह में पानी आ जाना |

तेरे सिवा माँ ,
अपने आशीष मुझे हरदम ऐसे   ही देती जाना ,
ये आशीष ही है मेरा सबसे बड़ा खजाना |

तेरे सिवा माँ ,हाँ तेरे सिवा माँ ,
 अल्का ..

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 4.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajeev Varshney के द्वारा
May 17, 2016

बहन अल्का माँ को समर्पित आपकी रचना किसी को भी भावनाओं से भर देगी. सच है माँ सा कोई नहीं . राजीव वार्ष्णेय

    Alka के द्वारा
    May 18, 2016

    आदरणीय राजीव भाई , आपका ब्लॉग पर स्वागत है | रचना पसंद करने के लिए धन्यवाद | सच है माँ सा कोई कहाँ .. साभार

Shobha के द्वारा
May 17, 2016

प्रिय अल्का जी आपकी कविता सबको उनकी माँ याद दिल देगीं अपनी पीड़ा आँखों में तू कैसे छुपा लेती है , पर आज भी मेरे दर्द को तेरी आँखों में पाना |

    Alka के द्वारा
    May 23, 2016

    आदरणीय शोभा जी आपकी प्रतिक्रिया हमेशा प्रोत्साहित करती है | साभार


topic of the week



latest from jagran