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ना जाने क्यों .....

Posted On: 8 Jul, 2016 कविता में

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न जाने क्यों हर बात पे डर लगता है ,
ये दिल अक्सर तन्हाइयों का घर लगता है |

ये फ़कत ख्याल था क्या ता उम्र साथ रहने का
अब तो ये दो पल का सफर लगता है |

तमाम उम्र जिसके इन्तजार में गुजर गई ,
क्यों उसे फिर से खोने का डर लगता है |

जुस्तज़ू बाक़ी नहीं जिंदगी से अब ज्यादा ,
पर सिर्फ होना तेरा अब भी असर रखता है |

न जाने क्यों हर बात पे डर लगता है ……

अलका …

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