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हर एक दिन ....

Posted On: 14 Aug, 2016 कविता में

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हर एक दिन कहीं जाके तो रुक जाता है ,
हर एक रात का एक पल भी सुबह से मिल जाता है |

लोग मिलते ,बिछड़ते हैं कई राहों में
पर कोई एक ही होता है जो सांसों में बस पाता है |

भूलने से भी कोई कहाँ भुलाया जाता है ,
जो सांसों में बसा हो वो तो हर साँस में याद आता है |

भूल गया वो अपना था ही कब
जो अपना है वो तो हर अहसास में आ जाता है |

न किसी से कोई शिकवा न गिला
पर जिसको भुलाना चाहे वो ही क्यों बेतरह याद आता है

हर एक दिन कहीं ……..

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

nishamittal के द्वारा
August 14, 2016

खूबसूरत सार्थक रचना अलका जी

    Alka के द्वारा
    August 19, 2016

    आदरणीय निशा मैम, रचना पसंद करने के लिए धन्यवाद् | अपना आशीर्वाद सदैव बनाये रखिये | साभार …


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