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मेरे छत की मुंडेर पर ...

Posted On: 1 Mar, 2017 कविता में

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मेरे छत की मुडेर पर आज चाँद बैठा है ,
ना जाने क्यों मुझे कुछ
उदास सा लगता है मेरे जैसा

उसके पिछलगू वो तारा
चमक तो रहा है पूरी शिद्दत से,
पर चाँद की पेशानी पे पड़ी उदासी
उसको कौन मिटाएगा,

शायद वो ढूंढता है किसी को ,
तभी तो पूरा दिखता भी नहीं है
आधा ही नजर आता है |

अभी तो जाना है दूर तलक
इन्तजार लंबा है ,
पर चाँद बढ़ता जायेगा

हर दिन इन्तजार में जलकर
अपनी रौशनी बढ़ाते हुए
जिस दिन अपनी चांदनी से मिल जायेगा
उस दिन वो पूरा हो जायेगा |

चांदनी से मिलकर ढेरों अठखेलियां कर
अपने प्यार से पूरे जग को जगमगायेगा
मेरे छत की मुडेर वाला चाँद
फिर उदास ना रह जायेगा

वो उदास चाँद फिर मुस्कराएगा
फिर मुस्कराएगा …

अलका ..

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
March 15, 2017

हर दिन इन्तजार में जलकर अपनी रौशनी बढ़ाते हुए जिस दिन अपनी चांदनी से मिल जायेगा उस दिन वो पूरा हो जायेगा !! आदरणीय अलका जी ! बहुत खूब ! जीव और ईश्वर के मिलन का अदभुद भाव ! एक चाँद है तो दूसरा उसकी चांदनी ! मंच पर पठनीय और विचारणीय प्रस्तुति हेतु सादर अभिनन्दन और ‘बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक’ चुने जाने हेतु हार्दिक बधाई !

    Alka के द्वारा
    March 18, 2017

    आदरणीय सदगुरू जी , कविता पसंद करने प्रोत्साहन व बधाई के लिए साभार धन्यवाद ।

yatindrapandey के द्वारा
March 11, 2017

मैंने शायद आज आपको पहली बार पढ़ा मुझे प्रतिदिन कोई न कोई लेखनी अपने दिल के करीब महसूस होती है किसी न किसी के लेखक की पर आपको अवगत करा दू की आपकी ये लेखनी आज मेरी पसंदिता रही JJ पर अभिनन्दन यतीन्द्र

    Alka के द्वारा
    March 14, 2017

    आदरणीय यतीन्द्र जी , सर्वप्रथम आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है | आपकी प्रतिक्रिया बेहद उत्साहवर्धक है | रचना पसंद करने के लिए धन्यवाद . .साभार

Alka के द्वारा
March 11, 2017

नूपुर जी , आपका ब्लॉग पर स्वागत है | रचना पसंद करने के लिए धन्यवाद | साभार |

Noopur के द्वारा
March 9, 2017

bahut खूबसूरत कविता

Alka के द्वारा
March 6, 2017

आदरणीय शोभाजी , प्रोत्साहन व् आशीर्वाद के लिए साभार धन्यवाद |

Shobha के द्वारा
March 6, 2017

 प्रिय अलका जी आप बहुत सुंदर लिखती हैं आपकी पंक्तियाँ दिल हिला देती हैं

Alka के द्वारा
March 2, 2017

धन्यवाद् प्रदीप जी साभार …

deepak pande के द्वारा
March 2, 2017

सूंदर रचना आदरणीय अलका जी


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