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नए ख्वाब सजाने का मन है ...

Posted On: 8 Mar, 2017 कविता में

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सभी को मेरी तरफ से महिला दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं …

फिर आँखों में नए ख्वाब सजाने का मन है ,
फिर नए रास्तों पे बढ़ जाने का मन है |

कुछ हसरतों को ताला लगा के चाभी थी गुमा दी ,
फिर उस चाभी को ढूंढ लाने का मन है |

फिर बाग़ में बिंदास नंगे पैर दौड़ जाऊं
फिर तितलियों को पकड़ लाने का मन है |

न जाने कहाँ खो दिया था मैंने खुद को ,
फिर आज खुद को ढूंढ लाने का मन है|

कुछ ख्वाहिशें अधूरी कुछ अधूरे ख्वाब थे ,
उन ख्वाहिशों को पूरा कर जाने का मन है |

एक उम्र गुजार दी खुश करने में सब को ,
फिर अपने लिए कुछ कर जाने का मन है |

पर लगा के अपनी सब हसरतों को आज ,
फिर आसमान में उड़ जाने का मन है
|

फिर आँखों में नए ख्वाब सजाने का मन है ,
कुछ कर जाने का मन है …


अलका ..

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
March 17, 2017

एक उम्र गुजार दी खुश करने में सब को , फिर अपने लिए कुछ कर जाने का मन है | पर लगा के अपनी सब हसरतों को आज , फिर आसमान में उड़ जाने का मन है | आदरणीया अलका जी ! बहुत सुन्दर और महिलाओं को जागरूक करती कविता ! बहुत बहुत अभिनन्दन और बधाई !

    Alka के द्वारा
    March 24, 2017

    आदरणीय सद्गुरु जी , रचना पसंद करने के लिए बहुत धन्यवाद | आपकी ब्लॉग पर उपस्थिति हमेशा उत्साहित करती है | साभार धन्यवाद् ..


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