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मेरी खतायें ...

Posted On: 26 Mar, 2017 कविता में

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मेरी खताओं की सजा ,
रब मुझको ही दे देना ,

उनके हिस्से में आये जो गम
वो भी मुझे दे देना ,

मेरी नादानियां उनके लिए
जो रंज कई ले आई ,

ए रब मुझे ही तू उन
नादानियों की सजा देना |

उनके जीवन में फिर से
खुशयों का मौसम आये

उनके हिस्से का पतझड़
मेरे नाम ही कर देना |

मेरी खताओं की सजा ….

अलका ..

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Bhola nath Pal के द्वारा
March 28, 2017

“उनके हिस्से का पतझड़ मेरे नाम ही कर देना |” कभी कभी पागलपन भी दबा बन जाता है . है न ………

    Alka के द्वारा
    March 29, 2017

    आदरणीय सर जी रचना पसंद करने वह प्रोत्साहन के लिए साभार धन्यवाद


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