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दुआ ....

Posted On: 6 Apr, 2017 कविता में

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कोई दूर कितना भी हो ,
हम कह न पाएं जो दिल की सदा

चाहे खास मौका हो ,
गर दे न पाएं हम उनको दुआ ,

उदासी की बदली हाँ छाती तो है ,
ये आँख कुछ नम हो जाती तो है

पर ये तो दस्तूर दुनिया का है ,
कभी पास कभी दूर कोई जो है

आज का दिन हमारे लिए खास है ,
दुआ देने का ये मेरा अंदाज है

सदा तुम रहो खुश आसमान छुओ
प्रिय ये खुदा से दुआ आज है |

अलका

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

amarsin के द्वारा
April 7, 2017

khaamosh dua jo bhaati hai khuda ko, pukaarne waale puraarte hi rah jaatey hai….

    Alka के द्वारा
    April 7, 2017

    अमर जी कविता पसंद करने के लिए साभार धन्यवाद|


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