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बंद पलकों में कोई आये ..(ग़ज़ल )

Posted On: 6 Sep, 2017 कविता में

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बंद पलकों में कोई आये ,
इन्हे गवारा नहीं है ,
इनके मोती जो बिखर जाये
इन्हे गवारा नहीं है|

यूँ ही मुस्कराती रहती है
सुबहो से शाम तक
कोई इनके गम पढ़ जाये
इन्हे गवारा नहीं है |

यूँ ही तकती रहती हैं
राहों को ये अक्सर
कोई कह के जो न आये
इन्हे गवारा नहीं है |

पलकों के रास्ते जो
दिल में उतर गए
वो लोग दूर जाएँ
इन्हे गवारा नहीं है |

किसे हम आँखों में बसाये
किसे नज़रों से गिरा दे ,
ये कोई मुझे समझाए
इन्हे गवारा नहीं है |

बंद पलकों में कोई आये ………

अलका ….

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

amitshashwat के द्वारा
September 7, 2017

माननीय अलका जी , ग़ज़ल द्वारा भाव की सुन्दर आत्मिक प्रस्तुति…, धन्यवाद!

    Alka के द्वारा
    September 8, 2017

    आदरणीय अमित जी , ब्लॉग पर आपका स्वागत है | प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद् |


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